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आखिर क्या है Web 3.0, इसके आने के बाद कितनी बदल जाएगी आपकी जिंदगी

Web 3.0 क्या है – इंटरनेट की एक अलग दुनिया

जिस तरह से स्कूल में standard होती है ठीक उसी तरह से वेब का भी version होता है। वेब को हम तीन versions में बांट सकते हैं Web 1.0, Web 2.0 और Web 3.0।

1990 में Tim Berners-Lee ने वेब का अविष्कार किया था जिसके बाद उसे Web 1.0 नाम दिया गया। लेकिन कुछ सालों बाद ही वेब और विकसित हुआ और Web 2.0 अस्तित्व में आया।

आजकल हम जिस वेब का अनुभव करते हैं वह भी Web 2.0 है। Facebook, Instagram, Twitter, Wikipedia ये सभी वेब 2.0 के अंतर्गत ही आते हैं। लेकिन अब धीरे धीरे हम वेब के नए और वर्जन Web 3.0 की ओर बढ़ रहे हैं।

Web 3.0 अभी तक का सबसे एडवांस्ड इंटरनेट होगा, जिससे आप कोई काम कर भी सकेंगे और उसमें हिस्सेदार भी बन सकेंगे. मौजूदा समय में हमारे ज्यादातर काम इंटरनेट (Internet) से ही होते हैं. इंटरनेट अब सिर्फ साधारण इंटरनेट नहीं रहा, ये काफी हाई टेक (High tech) हो चुका है. लेकिन, अगर सब कुछ सही रहा तो जल्द ही एक ऐसा समय भी आ जाएगा, जब आप इंटरनेट के एक ऐसे स्वरूप को एक्सपीरियंस करेंगे, जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होगी. जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘वेब 3.0’ (Web 3.0) की. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि आपने इससे पहले न तो Web 3.0 के बारे में कभी पढ़ा होगा और न ही पहले कभी सुना होगा. लेकिन, सच्चाई तो ये है कि इंटरनेट की इस दुनिया में Web 3.0 इस वक्त काफी सुर्खियां बटोर रहा है. Web 3.0 के बारे में ज्यादा जानने से पहले आपको ये जानना बहुत जरूरी है कि अभी हम जिस के इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं, वह Web 2.0 है और इससे पहले ये पूरी दुनिया Web 1.0 से चल रही थी ।

कब आया था Web 1.0 ( 1989-2004)

बता दें कि साल 1989 में Web 1.0 आया था. दुनिया में Web 1.0 आने के करीब 15 साल बाद यानी साल 2004 में Web 2.0 भी आ गया था. यहां आपको ये जानना भी बहुत जरूरी है कि Web 2.0 आने के बाद भी Web 1.0 का इस्तेमाल होता है, हालांकि अब इसका इस्तेमाल बहुत कम हो गया है। यह वेब का पहला version था जिसने लोगो को इंटरनेट के क्षमता के बारे में बताया। सूचना केवल टेक्स्ट के रूप में होती थी जिसे आप सिर्फ पढ़ सकते थे । आप न ही उसे share कर सकते थे और ना ही उसपर comment के जरिये अपना विचार रख सकते थे | User interaction ना के बराबर था ।

Web 2.0 ( 2004 – अभी तक )

वेब 2.0 में वेबसाइट्स dynamic होने लगी जैसे कि e-commerce, social media, blogs जहां पर information को बार बारupdate किया जा सकता है । जो कि web 1.0 में नही होता था । Facebook, Instagram, Youtube, Twitter जैसे प्लेटफॉर्म्स आये जिससे लोगो के बीच connectivity बढ़ी ।JavaScript, HTMl, CSS3 Python जैसे प्रोग्रामिंग लैंग्वेज आये जिससे वेबसाइट और भी ज़्यादा dynamic होने लगे । User interaction बढ़ा

क्या Web 3.0 आने के बाद बंद हो जाएगा Web 1.0 और 2.0

क्रिप्टो एक्सपर्ट ajay singh nirwan ने बताया कि Web 3.0 अभी तक का सबसे एडवांस्ड इंटरनेट होगा, जिससे आप कोई काम कर भी सकेंगे और उसमें हिस्सेदार भी बन सकेंगे. उन्होंने कहा कि ई-कॉमर्स वेबसाइट, नेट बैंकिंग, सोशल मीडिया जैसे तमाम प्लेटफॉर्म Web 2.0 के उदाहरण हैं. अजीत खुराना ने कहा कि Web 3.0 के आने के बाद भी Web 1.0 और Web 2.0 का इस्तेमाल होता रहेगा. लेकिन, जब Web 3.0 आएगा, तो ये अभी तक का सबसे एडवांस्ड इंटरनेट बनकर सामने आएगा ।

Web 3.0 आने के बाद आपका जीवन कितना और कैसे बदल जाएगा?

साल 1989 में जब Web 1.0 आया था तो उस वक्त हम इंटरनेट पर मौजूद जानकारियों को सिर्फ पढ़ सकते थे. दरअसल, उस समय इंटरनेट पर उपलब्ध सारा डेटा टेक्स्ट फॉर्म में था. लेकिन, जब Web 2.0 आया तो इसने पुराने इंटरनेट की तुलना में नए इंटरनेट को पूरी तरह से बदलकर रख दिया. Web 2.0 के जरिए अब हम पढ़ने के साथ-साथ सुन और देख भी सकते हैं. इसके साथ ही हमारे ज्यादातर जरूरी काम भी इंटरनेट से ही पूरे हो जाते हैं. इतना ही नहीं, Web 2.0 के जरिए ही हमें गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स मिले ।

Web 2.0 में अगर आप गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म्स पर अपना कोई कंटेंट डालते हैं तो उस कंटेंट पर आपका पूरा अधिकार नहीं होता, आपके कंटेंट पर उस प्लेटफॉर्म का ही पूरा अधिकार होता है, जिस पर उसे अपलोड किया गया है. मान लीजिए आपने फेसबुक पर कोई फोटो पोस्ट की है, लेकिन उस फोटो पर आपका पूरा नियंत्रण नहीं है. क्योंकि फेसबुक का मन हुआ तो आपकी फोटो को आपके अकाउंट से ही हटा सकता है. लेकिन, Web 3.0 में ऐसा नहीं हो पाएगा. आपके कंटेंट पर पूरा अधिकार आपका ही होगा. यानी, Web 3.0 आने के बाद आप अभी के मुकाबले ज्यादा पावरफुल हो जाएंगे. यह Web 2.0 से ज़्यादा सुरक्षित, मजबूत और खुली होगी। Web 3.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह विकेन्द्रित (decentralized) होगी। जानकारों का मानना है कि Web 3.0 का कॉन्सेप्ट ही ऐसे प्लेटफॉर्म्स के एकाधिकार या मनमानी ताकतों को खत्म करना है।

Web 3.0 में ऐसे वेबसाइट्स होंगे जो AI, Machine Language और Blockchain जैसे टेक्नोलॉजी पर आधारित होंगे । विकेंद्रीकरण ( decentralization) को बढ़ावा मिलेगा जिसमे किसी एक कंपनी के पास पूरा अधिकार नही होगा। आपको अपने data पर पूर्ण अधिकार होगा जिसके इस्तेमाल कोई और संगठन नही कर पायेगी ।

Decentralization का मतलब आप एक उदाहरण से समझिए – आप सभी Facebook और Instagram तो जरूर इस्तेमाल करते होंगे। आप इन प्लेटफॉर्म्स पर जब कोई Data share करते हैं (जैसे फ़ोटो, विडीयो) उसके बाद उस data पर इन कंपनियों का अधिकार हो जाता है। वो चाहे तो आपके data को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं या उसको हटा भी सकते हैं। इसको centralization भी कह सकते हैं जहाँ आपको एक कंपनी control कर रही है । लेकिन वेब 3.0 में ऐसा नही होगा , इसमें आप अपने data और content के मालिक खुद होंगे।

Blockchain Technology की तरह ही Web 3.0 में आपका डाटा किसी एक सर्वर पर Depend नही होगा बल्कि आपके अपने नेटवर्क पर स्टोर रहेगा।

कैसे काम करेगा Web 3.0

अब आपको ये तो मालूम चल ही गया है कि Web 3.0 में आप ज्यादा ताकतवर हो जाएंगे. ऐसे में जब आप Web 3.0 के जरिए इंटरनेट पर अपना कोई कंटेंट डालेंगे तो इसके बदले आपको एक डिजिटल टोकन मिलेगा. इसके साथ ही, आपके कंटेंट का पूरा अधिकार आपके पास ही होगा. Web 3.0 में गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसी कोई भी कंपनी अपनी मर्जी से आपका कंटेंट नहीं हटा पाएगी |

Web 3.0 के बारे में एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ये ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा, जहां सारा डेटा डिसेंट्रलाइज्ड होगा. दरअसल, ब्लॉकचेन एक ऐसी टेक्नोलॉजी है, जिसमें आपका कंटेंट या डेटा किसी कंपनी के डेटाबेस में नहीं बल्कि आपके डिवाइस में सेव होगा. इसका मतलब ये हुआ कि आपके डेटा के साथ कोई भी दूसरा व्यक्ति किसी तरह की कोई छेड़खानी नहीं कर पाएगा. अब बेशक वह गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियां ही क्यों न हों?

Web 3.0 के फायदे

इंटरनेट के दुनिया मे हमने कुछ दशकों में काफी विकास किया है । केवल 30 सालों में web 1.0 से लेकर web 3.0 तक का सफर भी कमाल का रहा है।

Web 1.0 ने हमें इंटरनेट के जरिये एक दूसरे से जुड़ने की क्षमता को पहचाना । Web 2.0 के जरिये हम इस सफर में और आगे बढ़े लेकिन यहाँ हमें किसी भी काम के किसी अन्य संगठन पर निर्भर होना पड़ता है ( जैसे ईमेल भेजने के लिए गूगल के सर्विस जीमेल पर)।

और अब Web 3.0 इंटरनेट पर हमारे अनुभव को और अधिक सुरक्षित, मजबूत और खुला बनाने वाला है । Web 3.0 के कुछ मुख्य फायदे इस प्रकार से हैं :

1.एंटी-मोनोपॉली :

Web 2.0 में कई कंपनियों जैसे कि गूगल और फेसबुक का मोनोपोली देखने को मिलता है । मोनोपॉली का मतलब है एकाधिकार, आप गूगल को ही ले लीजिए आजकल हर कोई ईमेल करने के लिए सिर्फ जीमेल का ही इस्तेमाल कर रहा है जो कि गूगल का एक प्रोडक्ट है ।

ऐसे में इस क्षेत्र में गूगल का एकाधिकार है और हम सब इसके लिए गूगल पर निर्भर हैं । लेकिन Web 3.0 में ऐसा नही होगा, यहां कोई एक कंपनी नही होगी जिसका एकाधिकार चल सके बल्कि एक Decentralized System होगा जिसका कंट्रोल सबके हाथों में होगा ।

2.सुरक्षित नेटवर्क :

चूंकि आपका डाटा किसी एक सर्वर पर निर्भर नही होगा बल्कि ब्लॉकचैन की तरह अलग अलग नेटवर्क पर store रहेगा, हैकर्स के लिए आपका डाटा trace कर पाना बहुत मुश्किल होगा।

3.आपके पास होगा आपके डाटा का अधिकार :

Web 3.0 में आपके डाटा का पूरा स्वामित्व आपके पास होगा जो कि अभी नही होता है । web 2.0 जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब पर जब आप कोई डाटा या कंटेंट शेयर करते है तो उस पर उन कंपिनयों का अधिकार हो जाता है जिसका वो अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन web 3.0 में आपके कंटेंट पर सिर्फ आपका ही अधिकार होगा।

4. Artificial Intelligence पर आधारित :

Web 3.0 की एक मुख्य खासियत होगी इसका Artificial Intelligence (AI) पर आधारित होना। अभी जब आप गूगल में किसी शब्द या वाक्य को सर्च करते हैं तो गूगल उन शब्दो के आधार पर आपको रिजल्ट शो करता है ना कि उस वाक्य या शब्द के मतलब को समझ कर। लेकिन वेब 3.0 में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटर्स इंसानों की तरह शब्दों का मतलब समझते हुए उसका result शो करेंगे।

Web 3.0 के उदाहरण

चूंकि web 3.0 एक ऐसा कांसेप्ट हैं जिसपर अभी बहुत रिसर्च होना बाकी है इसलिए इसका कोई सटीक उदाहरण देना थोड़ा मुश्किल है । लेकिन कई बड़ी कंपनियां जैसे Apple, Meta ने धीरे धीरे कर के web 3.0 को अपनाना शुरू कर दिया है । web 3.0 के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • Apple’s Siri और Google Assistant : आप सब ने apple के एक app Siri का नाम तो जरूर सुना होगा या फिर आपने google assistant का इस्तेमाल जरूर किया होगा। ये दोनों ही voice recognition softwares हैं जो कि आपके voice को समझ कर AI और Machine learning की मदद से आपको नतीजे दिखाते हैं। voice recognition भी web 3.0 की ही एक कड़ी है जिसकी मदद से machines आपसे बात कर सकते हैं।
  • Wolfram Alpha : Wolfram Alpha एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां पर आप किसी भी प्रकार का प्रश्न पूछ सकते हैं जिसका आपको एक सटीक जवाब मिल जाता है। wolfram alpha web 3.0 का इस्तेमाल कर के वेब से data इक्कट्ठा करता है और जब आप कोई सवाल टाइप करते हैं तो उस data और information का इस्तेमाल कर के आपको एक सटीक जवाब दिखाता है।

Web 3.0 कब आएगा

Web 3.0 के बारे में इतना कुछ जानने के बाद आपके मन मे यह सवाल जरूर आया होगा कि आखिर Web 3.0 की शुरुआत कब होगी ? तो मैं बताना चाहूंगा कि Web3.0 आने वाला नही है बल्कि आ चुका है।

वैसे तो इसका इसका 2 दशक पहले ही लगा लिया गया था। लेकिन जिस तरह वेब 2.0 को अपनाने में थोड़ा समय लगा वैसे ही Web 3.0 को धीरे धीरे अपना लिया जाएगा।

कई बड़े संगठन जैसे कि Google, Apple, Meta धीरे धीरे Web 3.0 को अपनाने की तरफ बढ़ रहे हैं और आने वाले कुछ सालों में इसके और भी उदाहरण देखने को मिलेंगे । फिलहाल हमलोग समकालिक रूप से Web 2.0 और Web 3.0 दोनों का इस्तेमाल कर रहे हैं । आपके घरों और उपकरणों को वेब के साथ जोड़ना ( जैसे कि Alexa ) भी एक तरह से web 3.0 के आगाज का उदाहरण है।

Web 3.0 और Cryptocurrency में क्या समानता है ?

Cryptocurrencies की तरह Web 3.0 भी Blockchain Technology पर आधारित होगी जिसमें आपका data किसी एक सर्वर पर store ना होकर अलग अलग नेटवर्क में बटा होगा । इसका मतलब आपके डाटा का पूरा राइट आपके पास होगा ना कि किसी दूसरे सर्वर या कंपनी के पास।

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